Hello दोस्तों आज मैं आपलोगों के लिए class-10th के social science (सामाजिक विज्ञान) के भूगोल विषय के महत्वपूर्ण लघुत्तरीय प्रश्न लेकर आया हूँ। आप इसे अपने कॉपी में लिखकर अवश्य याद कर ले।इसमे आपको chapter wise question with answer मिलेंगें। ये सारे जितने भी प्रश्न है वो previous exam मे पुछे गए।
आप इसे पढ़कर अपने friends को भी share कर दे। जिससे उनको भी लाभ मिल सके। मेरे नए नए updates लिए नीचे जाकर मुझे अवश्य follow कर ले।
भूगोल (Geography)
लघु उत्तरीय प्रश्न-
भारत: संसाधन एवं उपयोग
Q.1. चिपको आंदोलन क्या है ?
उत्तर - उत्तराखंड के टिहरी - गढ़वाल पर्वतीय जिले में सुन्दरलाल बहुगुणा के नेतृत्व में अनपढ़ जनजातियों द्वारा 1972 ई ० में यह आंदोलन प्रारम्भ हुआ था । इस आंदोलन में स्थानीय लोग ठेकेदारों को कुल्हाड़ी से हरे - भरे पौधों को काटते देख उसे बचाने के लिए अपने आगोश में पेड़ को घेरकर इसकी रक्षा करते थे , इसे ही चिपको आंदोलन कहते हैं ।
Q.2. भारत के किन भागों में नदी डेल्टा का विकास हुआ है ? यहाँ की मृदा की क्या विशेषता है?
उत्तर - भारत के पूर्वी तटीय मैदान में नदी डेल्टा का विकास हुआ । यहाँ की मृदा जलोढ़ है तथा यह काफी उपजाऊ होती है । इसका गठन बालू , सिल्ट एवं मृतिका के विभिन्न अनुपात से होता है । इसका रंग धुंधला से लेकर लालिमा लिये भूरे रंग का होता है ।
Q.3. मैंगनीज के उपयोग पर प्रकाश डालिए ।
उत्तर - मैंगनीज के उपयोग निम्न हैं -
( i ) शुष्क बैटरियों के निर्माण में
( ii ) फोटोग्राफी में
( ii ) चमड़ा एवं माचिस उद्योग में
( iv ) जंगरोधी इस्पात बनाने में
( v ) ब्लीचिंग पाउडर , काँच , दवाएँ , बिजली के सामान आदि को बनाने में किया जाता है ।
Q.4. लौह अयस्क के प्रकारों के नाम लिखिए ।
उत्तर - लौह अयस्क चार प्रकार के होते हैं।
( i ) हेमेटाइट ,
( ii ) मैग्नेटाइट ,
( iii ) लिमोनाइट और
( iv ) सिडेराइट ।
Q.5. कोयला के विभिन्न प्रकारों को लिखें ।
उत्तर - कोयला चार प्रकार के होते हैं-
( i )ऐंथ्रासाइट,
( ii ) बिटुमिनस ,
( iii ) लिग्नाइट और
( iv ) पीट ।
Q.6. जलोढ़ मृदा के विस्तार वाले राज्यों के नाम बतावें । इस मृदा में कौन - कौन सी फसलें लगायी जा सकती हैं ?
उत्तर - जलोढ़ मिट्टी के विस्तार वाले राज्य हैं - उत्तर प्रदेश , बिहार , पंजाब , गुजरात , राजस्थान , बंगाल , असम । इस मृदा में गन्ना , चावल , गेहूँ , मक्का , दलहन जैसे फसलें उगाई जा सकती हैं ।
Q.7. खनिजों के संरक्षण एवं प्रबंधन से क्या समझते हैं ?
उत्तर- खनिज क्षयशील तथा अनवीकरणीय संसाधन हैं । इनकी मात्रा सीमित है । ये यदि एक बार समाप्त हो गए तो इन्हें हम पुनः प्राप्त नहीं कर सकते । यदि लाभ के लालच में मनुष्य इनका अतिशय दोहन करने लगे तो पुनः इन्हें प्राप्त करने के लिए लाखों - लाखों वर्षों तक प्रतीक्षा करनी होगी । जिस देश में आर्थिक विकास नहीं हुआ है और वह देश खनिज संसाधनों में धनी है तो वह उनका निर्यात कर अपनी अर्थव्यवस्था संतुलित रखता है । अतः इनके महत्त्व को समझते हुए इनका संरक्षण तथा उचित प्रबंधन करना चाहिए । नई शोधों के द्वारा दुर्लभ खनिजों के स्थान पर प्रतिस्थापन खनिज को खोजने और विकसित करने की जरूरत है । ऐसी प्रौद्योगिकी एवं शोध को विकसित किया जाये कि खनिजों के अपव्यय को रोका जा सके ।
Q.8. पेट्रोलियम से किन - किन वस्तुओं का निर्माण होता है ?
उत्तर – पेट्रोलियम से निर्मित होने वाली वस्तुएँ निम्न हैं
( i ) गैसोलीन ( ii ) डीजल
( iii ) किरोसिन तेल ( iv ) स्नेहक ( ग्रीस )
( v ) पेट्रोल ( vi ) कृत्रिम रेशा
( vii ) कीटनाशी एवं अन्य दवाइयाँ
( vii ) साबुन ( ix ) प्लास्टिक आदि ।
Q.9. जल संसाधन के क्या उपयोग हैं ? लिखें ।
उत्तर - भारत मूलतः कृषिप्रधान देश है । जल का मुख्य उपयोग सिंचाई के लिए किया जाता है । जल का उपयोग विद्युत उत्पादन के लिए भी किया है | आबादी बढ़ने के साथ ही जल की मांग सभी क्षेत्रों में काफी बढ़ गई है । जल के उपयोग की सूची काफी लंबी है । पेयजल , सिंचाई , उद्योग , जन - स्वास्थ्य , घरेलू कार्य , स्वच्छता तथा मल - मूत्र विसर्जन आदि कार्यों के लिए जल आवश्यक है । परमाणु - संयंत्र - शीतलन , मत्स्य - पालन , कृषि , वानिकी , जल - क्रीड़ा जैसे कार्य की कल्पना जल के बिना नहीं जा सकती है । प्राणियों के शरीर में 65 % तथा पेड़ - पौधों में 65-99 % जल का अंश विद्यमान रहता है।
Q.10. नदीघाटी परियोजनाओं को बहुउद्देशीय क्यों कहा जाता है ?
उत्तर - नदियों पर बराज बनाकर ऐसा उपाय करना , जिससे सिंचाई के साथ बिजली उत्पन्न करना , बाढ़ की रोकथाम करना , मिट्टी का कटाव रोकना , मछली पालन , नहर के निर्माण द्वारा यातायात की सुविधा बढ़ाना और पर्यटन उद्योग हेतु रमणीक स्थानों का निर्माण आदि अनेक लाभ एक ही समय साथ - साथ किये जा सकें तो ऐसी परियोजना बहुउद्देशीय परियोजना कहलाती है । सिंचाई और भूमि का वैज्ञानिक उपयोग एवं प्रबन्धन सुनिश्चित कराना , मछली फार्मिंग का विकास एवं कृत्रिम झीलों में आमोद - प्रमोद के साधन उपलब्ध कराना बहुउद्देशीय परियोजना के अंतर्गत आता है।
Q.11. बिहार में वन सम्पदा की वर्तमान स्थिति का वर्णन कीजिए ।
उत्तर - बिहार विभाजन के बाद वन विस्तार में बिहार राज्य की स्थिति काफी दयनीय है । वर्तमान बिहार में अधिकतम भूमि कृषि योग्य है । मात्र 6764.14 हेक्टेयर में वन क्षेत्र बच गया है , यह कुल भौगोलिक क्षेत्र का मात्र 7.1 % है । बिहार के 38 जिलों में से 17 से वन क्षेत्र समाप्त हो गया है । प ० चम्पारण , बाँका , जमुई , मुंगेर , नवादा , नालंदा , गया , रोहतास , कैमूर और औरंगाबाद जिलों में वनों की स्थिति कुछ बेहतर है , जिसका कुल क्षेत्रफल 3700 वर्ग किमी है । शेष में अवक्रमित वन क्षेत्र है , वन के नाम पर केवल झाड़ - झुरमुट बच गये हैं ।
Q.12. परमाणु - शक्ति किन – किन खनिजों से प्राप्त होती है ?
उत्तर - इल्मेनाइट , बैनेडियम , एंटीमनी , ग्रेफाइट , यूरेनियम , मोनाजाइट आदि खनिजों से परमाणु शक्ति प्राप्त होती हैं । भारत में यूरेनियम का विशाल भंडार झारखण्ड के जादूगोड़ा में है जहाँ यह 94 किमी लम्बी पट्टी में फैला है । मोनाजाइट केरल राज्य में प्रचूर मात्रा में पाया जाता है ।
Q.13. वन के पर्यावरणीय महत्त्व का वर्णन कीजिए ।
उत्तर – वन पृथ्वी का सुरक्षा कवच है । यह न केवल संसाधन होता है । बल्कि पारिस्थितिक तंत्र के निर्माण में महत्त्वपूर्ण घटक है । वन मृदा कटाव को रोकने के साथ ही पर्यावरण में कार्बन डाइऑक्साइड की मात्रा को घटाते हुए जीवनदायी ऑक्सीजन की मात्रा को बढ़ाता है । यह भूमिगत जल स्तर को बढ़ाने के साथ ही वर्षा की उपलब्धता में वृद्धि करता है ।
Q.14. वन- जीवों के ह्रास के चार प्रमुख कारकों का उल्लेख कीजिए ।
उत्तर — वन - जीवों के ह्रास के मुख्य कारक निम्नलिखित हैं भोजन , सुरक्षा एवं आनन्द के लिए वन्य जीवों का शिकार वनीय जीवों के विनाश का एक बड़ा कारण है । वन्य जीवों के चारागाह के विनाश के कारण वन्य प्राणी लुप्त हो गए । यातायात की सुविधाओं के कारण वन्य जीवों के प्राकृतिक आवासों का अतिक्रमण हुआ , प्रदूषणजनित समस्या आदि हुई
Q.15. धात्विक और अधात्विक खनिज में अंतर स्पष्ट करें । उत्तर - धात्विक और अधात्विक खनिज में निम्नलिखित अंतर हैं .
घात्विक खनिज
1. इन खनिजों को तोड़ने या गलाने पर धातुएं प्राप्त होती है- जैसे- लोहा,तांबा आदि।
2. ये कठोर एवं चमकीले होते हैं ।
3. ये खनिज सामान्यतः आग्नेय चट्टानों में मिलते हैं।
4. इन खनिजों को किसी दूसरे रूप में भी परिवर्तित किया जा सकता है।
अधात्विक खनिज
1. इन खनिजों को तोड़ने या गलाने पर धातुएं प्राप्त नहीं होती है ।जैसे -अभ्रक,कोयला
2. इन खनिजों में अपनी चमक नहीं होती है।
3. यह खनिज सामान्यतः परतदार चट्टानों में मिलते है।
4. इन खनिजों कोकिसी दूसरे रूप में प्रयुक्त नहीं किया जा सकता है।
Q.16. खादर और बांगर में कोई तीन अंतर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर-खादर और बांगर में निम्नलिखित अंतर है-
खादर
1. नई जलोढ़ मिट्टी खादर कहलाती हैं।
2. इसमें मिट्टी के कर महीन होते हैं।
3. यह नदी के समीपवर्ती क्षेत्रों में मिलता है।
4. इस पर बाढ़ का पानी हर साल चढ़ता है।
बांगर
1. पुरानी जलोढ़ मिट्टी बांगर कहलाते हैं।
2. इसमें मिट्टी के कण होते होते हैं।
3. यह नदी के दूरवर्ती क्षेत्रों में मिलती है।
4. इस पर बाढ़ का पानी हर साल नहीं चढ़ता है।
Q.17. सौर - ऊर्जा का उत्पादन कैसे होता है ?
उत्तर - जब फोटोवोल्टाइक सेलों में विपाश्ति सूर्य की किरणों को ऊर्जा में परिवर्तित किया जाता है , तो सौर ऊर्जा का उत्पादन होता हैं । यह कम लागत वाला पर्यावरण के अनुकूल तथा निर्माण में आसान होने के कारण अन्य ऊर्जा के स्रोतों की अपेक्षा ज्यादा लाभदायक है । यह सामान्यतः हीटरों , कुलर्स , प्रकाश आदि उपकरणों में अधिक उपयोग की जाती है।
Q.18. फसल चक्रण मृदा संरक्षण में किस प्रकार सहायक है ?
उत्तर- फसल चक्रण द्वारा मृदा के पोषणीय स्तर को बरकरार रखा जा सकता है । गेहूँ , कपास , मक्का , आलू आदि को लगातार उगाने से मृदा में ह्रास उत्पन्न होता है । इसे तिलहन - दलहन पौधे की खेती के द्वारा पुनः प्राप्त किया जा सकता है । इससे नाइट्रोजन का स्थिरीकरण होता है ।
Q.19. संसाधनों का संरक्षण क्यों आवश्यक है ?अथवा, प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण क्यों आवश्यक है ?
उत्तर - संसाधनों का विवेकहीन उपभोग और अति उपयोग के कारण कई सामाजिक - आर्थिक और पर्यावरणीय समस्याएँ पैदा हो सकती है । इन समस्याओं से बचाव के लिए विभिन्न स्तरों पर संसाधनों का संरक्षण आवश्यक है । पृथ्वी पर कुछ संसाधन ऐसे हैं जिनकी मात्रा सीमित है । यदि वैसे संसाधनों का आवश्यकता से अधिक दोहन करेंगे तो वे बहुत जल्द समाप्त हो जायेंगे और समाप्त होने के बाद इनका पुनः निर्माण संभव नहीं है । अत : संसाधनों का संरक्षण आवश्यक है ।
कृषि
Q.20. व्यापारिक कृषि एवं निर्वाहक कृषि में अंतर स्पष्ट करें।
उत्तर-व्यापारिक कृषि में खेती आर्थिक लाभ कमाने के उद्देश्य से की जाती है। इसमें पूंजी एवं तकनीक में खर्च की जाती है ताकि अधिकाधिक उत्पादन हो, जैसे-दलहन की खेती। परंपरागत तरीके से की जाने वाली खेती किसान अपने निर्वाहक के लिए करता है, इसे निर्वाहक कृषि कहते हैं। इस खेती में कम पूंजी लगाकर जीवन निर्वाह हेतु फसल उत्पादन की जाती है। जैसे-धान की खेती।
Q.21. हरित क्रांति से आप क्या समझते हैं ?
उत्तर – आधुनिक एवं वैज्ञानिक तकनीकों के द्वारा कृषि की उपज में क्रांतिकारी परिवर्तन हुआ है , इसे ही हरित क्रांति कहते हैं । भारतीय हरित क्रांति का जनक डॉ . एम . एस . स्वामीनाथन को कहा जाता है । 1960-70 के दशक में हरित क्रांति हुई जिसमें गेहूँ के पैदावार में अप्रत्याशित वृद्धि हुई । इस क्रान्ति के अन्तर्गत संकर किस्म का उन्नत बीज , रासायनिक खाद , सिंचाई , कीटनाशक आदि का प्रयोग कर खाद्य उत्पादन में अप्रत्याशित वृद्धि की गई है तथा खाद्य सुरक्षा में यह मील का पत्थर साबित हुई है।
Q.22. जूट की खेती किन दो राज्यों में अधिक होती है और क्यों?
उत्तर - जूट रेशेदार फसल है। इसे 'सुनहरा रेशा' के नाम से भी जाना जाता है। पी। बंगाल, बिहार और असम प्रमुख जूट उत्पादक राज्य है। इन राज्यों में जूट की खेती के लिए अनुकूल भौगोलिक दशाएँ उपलब्ध हैं। चौकायुक्त मिट्टी, गर्म और गर्म जलवायु, सड़ाने के लिए पर्याप्त पानी की आवश्यकता नदी का जल - प्रवाह आदि दशाएं पाई जाती है। अत: इन राज्यों में जूट की खेती अधिक होती है।
Q.23. भारतीय कृषि की पाँच प्रमुख विशेषताओं को लिखिए ।
उत्तर - भारतीय कृषि की पाँच प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं .
( i ) भारतीय कृषि आर्थिक जीवन का प्राण है । भारत में लगभग 2/3 लोगों की जीविका कृषि पर आधारित है ।
( ii ) यहाँ की विशाल जनसंख्या के लिए भोजन कृषि से ही प्राप्त होता है ।
( iii ) यहाँ की कृषि से कच्चे माल उद्योगों को प्राप्त होते हैं । जैसे - कपास से सूती वस्त्र उद्योग , गन्ना से चीनी उद्योग , जूट - उद्योग एवं अन्य कृषि उत्पाद कृषि प्रसंस्करण उद्योगों को कच्चा माल देते हैं । जैसे - रसदार फल , जैम , स्वतंत्र उत्पादन के लिए आधार प्रदान करते हैं । इस तरह की कृषि उद्योगों को मजबूती प्रदान करती है ।
( iv ) यहाँ की जलवायु , मिट्टी एवं धरातल की विविधता के कारण भारत में फसलों की विविधता पायी जाती है । चाय , गन्ना , मोटे अनाज एवं कुछ तिलहनों के उत्पादन में विश्व में अग्रणी स्थान है ।
( v ) राष्ट्रीय आय में भारतीय कृषि का मुख्य योगदान है । देश की 24 % आय कृषि से प्राप्त होता है।
Q.24. भारतीय कृषि की निम्न उत्पादकता के कारणों को संक्षेप लिखिए ।
उत्तर- भारतीय कृषि की निम्न उत्पादकता के कारण निम्नलिखित हैं :
( i ) जनसंख्या का कृषि भूमि पर निरंतर बढ़ता दबाव ।
( ii ) घटता कृषि भूमि क्षेत्र ।
( iii ) खेतों का छोटा आकार ।
( iv ) भू - स्वामित्व प्रणाली ।
( v ) सिंचाई की कमी और अनिश्चित सुविधाएँ ।
( vi ) मानसूनी वर्षा की अनिश्चितता ।
( vii ) कृषि योग्य भूमि का निम्नीकरण ।
( viii ) कम पूँजी निवेश ।
( ix ) आधुनिक कृषि तकनीक , कीटनाशक , रासायनिक खाद आधुनिक यंत्र का सीमित उपयोग ।
( x ) कृषि में वाणिज्यीकरण का अभाव ।
Q.25. भारत में गेहूँ की खेती के लिए आवश्यक भौगोलिक दशाओं को लिखें तथा गेहूँ के चार उत्पादक राज्यों के नाम बताएँ ।
उत्तर - गेहूँ भारत की दूसरी महत्त्वपूर्ण खाद्यान्न फसल है । यह रबी ऋतु की फसल है । इसकी खेती के लिए बोते समय 10 ° से 15 ° C तथा पकते समय 20 ° से 25 ° C तापमान की आवश्यकता होती है । 75 सेमी वर्षा इसके उत्पादन के लिए अधिक उपयुक्त है । हल्की दोमट या बलुई दोमट मिट्टी तथा सस्ते कुशल एवं पर्याप्त श्रमिक की आवश्यकता होती है । उत्तरप्रदेश . पंजाब , हरियाणा , राजस्थान , बिहार महत्त्वपूर्ण गेहूँ - उत्पादक राज्य है ।
निर्माण उद्योग
Q.26. उद्योगों के स्थानीयकरण के चार कारणों को लिखिए।
उतर - किसी उद्योग की स्थापना में कई कारकों का योगदान होता है । इन कारकों को दो वर्गों - भौतिक और मानवीय कारकों में बाँट सकते हैं । भौतिक कारकों के अंतर्गत कच्चा माल , शक्ति के साधन , जल की सुलभता तथा अनुकूल जलवायु आते हैं । मानवीय कारकों में श्रमिक , बाजार , परिवहन पूँजी , सरकारी नीतियाँ आते हैं ।
Q.27. कृषि - आधारित उद्योग और खनिज - आधारित उद्योग में अंतर को स्पष्ट करें ।
उत्तर - कृषि पर आधारित उद्योग
( 1 ) इन उद्योगों को कच्चा माल कृषि से मिलता है ।
( ii ) ये उद्योग ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर प्रदान करते है ।
( iii ) ये अधिकतर उपभोग्य वस्तुओं का ही उत्पादन करते हैं ।
( iv ) उदाहरण — चीनी , पटसन , वस्त्र तथा वनस्पति तेल आदि ।
खनिज पर आधारित उद्योग–
( ) इन उद्योगों को कच्चा माल खनिज से मिलता है ।
( i ) ये उद्योग ग्रामीण तथा शहरी दोनों क्षेत्रों में रोजगार प्रदान करते हैं ।
( ii ) ये उपभोग तथा मूल्य पर आधारित दोनों प्रकार की वस्तुओं का उत्पादन करते हैं ।
( iv ) उदाहरण — लोहा - इस्पात , इंजीनियरिंग उद्योग , पोत - निर्माण , मशीनी उपकरण आदि ।
Q.28. सार्वजनिक उद्योग और निजी उद्योग में अंतर स्पष्ट कीजिए ।
उत्तर सार्वजनिक क्षेत्र के उद्योग वे हैं , जो सरकार अथवा सरकारी एसियों द्वारा संचालित होते हैं । भिलाई इस्पात संयंत्र , बोकारो इस्पात संयंत्र , दुर्गापुर इस्पात संयंत्र सार्वजनिक क्षेत्र के उद्योग हैं । इसमें भारी तथा आधारभूत उद्योग सम्मिलित हैं । निजी उद्योग वे हैं , जिनका स्वामित्व तथा संचालन दोनों निजी हाथों में होता है , जैसे - टाटा लोहा एवं इस्पात उद्योग , बजाज ऑटो , रिलायंस इंडस्ट्रीज आदि निजी क्षेत्र के उद्योग हैं । इन उद्योगों की स्थापना लाभ कमाने के उद्देश्य से की जाती है ।
Q.29. उपभोक्ता उद्योग से आप क्या समझते है?
उत्तर - जिस उद्योग का प्रत्यक्ष संबंध उपभोक्ताओं से हो तथा उससे उत्पादित वस्तु ( उत्पाद ) सीधे उपभोक्ता को उपलब्ध हो उसे उपभोक्ता उद्योग कहते हैं । जैसे - तेल , दंतमंजन , कागज आदि ।
Q.30. मुंबई हाई तेल उत्पादक क्षेत्र का परिचय दें ।
उत्तर - मुम्बई हाई क्षेत्र मुम्बई तट से 176 किलोमीटर दूर उत्तर - पश्चिम दिशा में अरब सागर में स्थित है । यहाँ 1975 में तेल खोजने का कार्य शुरू हुआ । यहाँ समुद्र में ' सागर सम्राट ' नामक मंच बनाया गया है जो एक जलयान है और पानी के भीतर तेल के कुएँ खोदने का कार्य करता है । यहाँ 80 करोड़ टन तेल के भण्डार का अनुमान है ।
Q.31. भारत के निर्यात एवं आयात वाली प्रमुख वस्तुओं का उल्लेख करें।
उत्तर -भारत से निर्यात की जाने वाली वस्तुएं-इंजीनियरिंग के सामान ,रत्न और आभूषण, रसायन एवं संबद्ध उत्पादन, वस्त्र ,कृषि एवं संबद्ध उत्पादन ,अयस्क एवं खनिज आदि
भारत में आयात की जाने वाली वस्तुएं-पेट्रोलियम तथा संबंधित उत्पाद ,मशीनरी, इलेक्ट्रॉनिक सामान ,सोना, चांदी उर्वरक रसायन ,आलोह वस्तुएं आदि।
Q.32. नई औद्योगिक नीति के मुख्य बिंदुओं का वर्णन करें।
उत्तर- नई औद्योगिक नीति 2006 के आने के बाद बिहार सरकार द्वारा नए निवेशों को प्रोत्साहित करने के लिए उठाए गए कदम के बाद इस प्रक्षेत्र में काफी उत्साह बढ़ा है । बिआडा द्वारा उस प्रक्षेत्र में साहसिक कदम एवं औद्योगिक विकास हेतु प्रयास किए जा रहे हैं । 2006-07 में 172 . 45 करोड़ रू ० परियोजना लागत वाली 15 इकाइयों को जमीन दी गई है । . भागलपुर में हथकरघा का निर्माण , पटना हवाई अड्डे में कारगो कम्पलेक्स की स्थापना और फतुहा में अंतर्देशीय कंटेनर डीपो की स्थापना इसी के तहत किया जाने वाला प्रयास है ।
Q.33. उद्योग की अवस्थिति को प्रभावित करने वाले चार भौतिक कारक बताए ।
उत्तर - उद्योग की अवस्थिति को प्रभावित करने वाले चार भौतिक कारक इस प्रकार से हैं: (1) कच्चा माल, (ii) शक्ति के साधन, (iii) जल की सुलभता और (iv) ) अनुकूल मौसम।
Q.34. स्वामित्व के आधार पर उद्योग को उदाहरण सहित वर्गीकृत कीजिए ।
उत्तर - स्वामित्व के आधार पर उद्योग को दो भागों में बाँटा गया है (i) सार्वजनिक उद्योग - इसमें भारी तथा आधारभूत उद्योग सम्मिलित है । इनका संचालन सरकार स्वयं करती है । दुर्गापूर , भिलाई , राउरकेला के लोहा इस्पात केन्द्र , सेल सार्वजनिक उद्योग के उदाहरण है । (ii) संयुक्त अथवा सहकारी उद्योग - जब उद्योग में दो या दो से अधिक व्यक्तियों या सहकारी समितियों का योगदान हो तो उसे संयुक्त अथवा सहकारी उद्योग कहते हैं। ऑल इंडिया लिमिटेड, महाराष्ट्र के चीनी उद्योग, गुजरात के अमूल उद्योग इसी के उदाहरण है।
Q.35. लोहा एवं इस्पात उद्योग को बुनियादी उद्योग क्यों कहा जाता है ?
उत्तर - किसी भी लोहे से देश के बहुत सारे उद्याग जैसे भारी हल्के और मध्यम वर्ग के उद्योग बनी मशीनरी पर निर्भर करते हैं । अत : लौह इस्पात उद्योग को बुनियादी उद्योग कहते हैं ।
परिवहन, संचार एवं व्यापार
Q.36भारत में सड़कों के प्रादेशिक वितरण का वर्णन प्रस्तुत कीजिए ।
उत्तर- भारत में सड़कों के प्रादेशिक वितरण पर यदि हम ध्यान दें तो पाते हैं कि इनकी लम्बाई की दृष्टि से भारत में महाराष्ट्र का पहला स्थान है । यहाँ सड़कों की कुल लम्बाई 2.70 लाख किमी है । दूसरा स्थान उत्तर प्रदेश तथा तीसरा स्थान उड़ीसा का है जहाँ सड़कों की लम्बाई क्रमश : 2.47 लाख तथा 2.36 लाख किमी है । सबसे कम लम्बाई वाला राज्य लक्षद्वीप है , जहाँ मात्र 1 किमी लम्बी सड़क है । सड़कों के घनत्व की दृष्टि से केरल का पहला स्थान है जहाँ प्रति 100 वर्ग किमी क्षेत्र में 387 किमी सड़क है , वहीं गोवा और उड़ीसा क्रमश : दूसरे ( 258 किमी ) तथा तीसरे ( 152 किमी ) स्थान पर है । यह विवरण केवल पक्की सड़कों का है ।
Q.37. वायु परिवहन की प्रमुख विशेषताएं बताएं।
उत्तर-वायु परिवहन की प्रमुख विशेषताएं इस प्रकार हैं-
I. वायु परिवहन एक स्थान से दूसरे स्थान तक गमना गमन की तीव्रतम साधन है।
II. वायु परिवहन ने यात्रा समय को घटाकर दूरियों को कम कर दिया है।
III. दूरवर्ती ,दुर्गम और बिहड क्षेत्रों में वायु मार्ग सबसे उपयुक्त साधन है।
Q.38. भारतीय रेल परिवहन की प्रमुख विशेषताओं का उल्लेख कीजिए।
उत्तर - भारतीय रेल परिवहन की प्रमुख विशेषताएं निम्नलिखित है-
(i) दो बड़े शहरों एवं महानगरों के बीच तीव्र गति से चलने वाली राजधानी एक्सप्रेस एवं शताब्दी एक्सप्रेस ट्रेनों का परिचालन किया जा रहा है।
(ii) माल ढुलाई के लिए प्राइवेट कंटेनर , वैगन तथा मालगाड़ियाँ लगाई
(iii) ट्रेनों की दुर्घटना को रोकने के लिए इंजनों में स्वनियंत्रण युक्ति ( ACD ) की व्यवस्था की गई है ।
(iv) कोलकाता एवं दिल्ली में मेट्रो रेल के तहत भूमिगत रेल सेवा दी जा रही है ।
(v) रेल संपत्तियों की सुरक्षा एवं रेलयात्रियों की सुरक्षा के लिए जी ० आर ० पी ० एवं आर ० पी ० एफ ० की व्यवस्था है ।
(vi) विश्व की सबसे अधिक विद्युतीकृत रेलगाड़ियाँ रूस के बाद भारत में ही चलती है ।
(vii) अधिकांश स्टेशनों पर आरक्षण के लिए कंप्यूटर का प्रयोग ।
(viii) लंबी दूरी की गाड़ियाँ आरंभ की गई है , जैसे जम्मू से कन्याकुमारी तक हिमसागर एक्सप्रेस ।
(ix) फरक्का और मोकामा में गंगा नदी पर रेलपुलों का निर्माण किया गया है ।
(x) बड़े शहरों में दैनिक यात्रियों के आवागमन के लिए DMU , EMU एवं MEMU रेल सेवाएँ उपलब्ध हैं ।
Q.39. सड़क परिवहन के कोई चार गुण बताइए ।
उत्तर - सड़क परिवहन के चार गुण इस प्रकार से हैं :
( i ) सड़क मार्ग परिवहन का सबसे सामान्य और सुलभ साधन है
( ii ) मैदानी क्षेत्रों में इसका विकास करना सरल होता है
( iii ) यह सभी मार्गों के लिए कड़ी का काम करता है
( iv ) यह मार्ग घर - घर तक सेवा उपलब्ध करता - है ।
बिहार कृषि एवं वन संसाधन
Q.40. बिहार में नहरों के विकास से संबंधित समस्याओं को लिखें ।
उत्तर - आज बिहार के करीब 40.63 प्रतिशत भाग नहर के द्वारा ही सिंचित होता है । जब बिहार में नहरों के विकास करके सम्पूर्ण क्षेत्र सिंचित होने लगेंगे तो बिहार के कृषि का रूप दूसरा हो जाएगा । बिहार में नहरों के विकास में निम्न प्रकार की समस्याएँ आती है :
( i ) नदियों के जल स्तर में गिरावट ( ii ) बिहार के भूमि की बनावट ( ii ) सरकारों की उदासीनता ( iv ) क्षेत्रीय लोगों की निष्क्रियता
Q.41. सोन नदी घाटी परियोजना से उत्पादित जल - विद्युत का वर्णन कीजिए ।
उत्तर - सोन नदी घाटी परियोजना के अन्तर्गत जल - विद्युत उत्पादन के लिए शक्ति गृहों की स्थापना की गई है । सोन नदी का पश्चिम तट रोहतास जिले तथा पूर्वी तट औरंगाबाद जिले में पड़ता है । डिहरी से पूर्वी सोन नहर से वारुण में जल विद्युत का उत्पादन होता है , जबकि पश्चिमी नहर से इन्द्रपुरी में बिजली उत्पन्न की जाती है । इन दोनों नहरों से क्रमश : 6.60 मेगावाट बिजली उत्पन्न की जाती है । सोन नहर से ही कुछ और जल विद्युत उत्पादन की योजना प्रस्तावित है ।
Q.42. बिहार में वन विनाश के दो मुख्य कारकों को लिखें।
उत्तर - बिहार के वनों का वितरण बहुत ही असमान है| बिहार के मैदानी भागों एवं दियारा क्षेत्रों में तो प्राकृतिक वनों का पूर्णतः अभाव है । इस राज्य में वन - सम्पदा की स्थिति अत्यन्त दयनीय है । बिहार में वन विनाश के निम्नांकित दो मुख्य कारक हैं ( i ) बिहार में कृषि भूमि के विस्तार के लिए अंधाधुंध वृक्षों की कटाई हो रही है । भारी संख्या में वृक्ष काटे जा रहे हैं । वन क्षेत्र का एक विशाल क्षेत्र इससे प्रभावित हुआ ( ii ) निर्माण क्षेत्रों के विकास के लिए भी असंख्य वृक्ष काटे जा रहे । भवन निर्माण , कल कारखानों और उद्योग - धंधों के विस्तार के लिए भी वनों का विनाश हो रहा है । इस प्रकार वन क्षेत्र के विशाल भू - भाग को नष्ट किया जा रहा है । इस राज्य के लोगों में वनों के महत्त्व से सम्बन्धित जागरूकता का अभाव है । इन कारणों से बिहार में वनों का तेजी से ह्रास हुआ है तथा हो रहा है ।
Q.43. बिहार के अत्यधिक घनत्व वाले जिले का नाम लिखिए ।
उत्तर - पटना , दरभंगा , वैशाली , बेगसराय , सीतामढ़ी , सारण एवं सीवान अत्यधिक जनसंख्या घनत्व वाले जिले हैं । इन जिलों में राज्य की 17.50 % भूमि पर 28.17 % आबादी रहती है । इन जिला का घनत्व 1200 प्रति वर्ग किलोमीटर है । बिहार में सबसे अधिक जनसंख्या घनत्व वाला जिला पटना है । यहाँ प्रति वर्ग किमी 1471 व्यक्ति निवास करते हैं । इसके बाद दरभंगा और वैशाली का स्थान आता है । यहाँ क्रमशः 1342 एवं 1332 व्यक्ति प्रतिवर्ग किमी रहते हैं । चौथे स्थान पर बेगूसराय जिला है जहाँ प्रतिवर्ग किमी 1222 व्यक्ति रहते हैं । इसके बाद सीतामढ़ी , सारण और सिवान आते हैं ।
Q.44. बिहार की जनसंख्या सभी जगह एकसमान नहीं है , स्पष्ट करें।
उत्तर - बिहार का जनसंख्या वितरण सभी जगह एकसमान नहीं है । कहीं जनसंख्या बहुत अधिक है तो कहीं बहुत कम है । इसका मुख्य कारण यहाँ की आर्थिक , सामाजिक परिवेश और भौतिक विविधता है । जहाँ भी धरातल समतल जलोढ़ एवं मैदानी है वहाँ घनी आबादी है । इसके अलावे सिंचाई सुविधा , कृषि में नयी तकनीक का उपयोग , नगरीकरण के कारण अधिक है । जैसे — पटना , मुजफ्फरपुर एवं भोजपुर जिला में जनसंख्या अधिक है । बेतिया , शिवहर , शेखपुरा , लक्खीसराय जिला में जनसंख्या कम है । इसका प्रमुख कारण है कृषि का पिछड़ापन एवं कम क्षेत्रफल होने के कारण जनसंख्या का संकेन्द्रण कम है ।
Q.45. बिहार के किस भाग में सिंचाई की आवश्यकता है और क्यों ?
उत्तर - बिहार के किशनगंज , शिवहर , दरभंगा , अररिया , मधुबनी जिले -सिंचित क्षेत्रों की दृष्टि से काफी पीछे हैं । इन जिलों की सिंचाई की आवश्यकता सर्वाधिक है । किशनगंज के 21.81 % फसल क्षेत्र ही सिंचित है । इसके कारण इस क्षेत्र में कृषि काफी पिछड़ा हुआ है । बिहार राज्य कृषिप्रधान राज्य है । यह राज्य बाढ़ प्रभावित क्षेत्र है । यहाँ स्थायी सिंचाई की आवश्यकता काफी अधिक है ।
Q.46. बिहार में दलहन के उत्पादन एवं वितरण का संक्षिप्त विवरण प्रस्तुत कीजिए ।
उत्तर - बिहार के दलहन फसलों में चना , मसूर , खेसारी , मटर एवं गरमा मूंग , रबी दलहन फसलें है जबकि अरहर , मूंग , खरीफ दलहन की फसलें हैं । 2006-07 में बिहार में रबी दलहन की खेती 519.6 हजार हेक्टेयर भूमि में की गई । कुल उत्पादन 372 हजार मेट्रिक टन था । इसी प्रकार खरीफ दलहन की खेती 87.26 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में किया गया । कुल उत्पादन 74 हजार मेट्रिक टन था । दलहन उत्पादन में पटना जिला प्रथम , औरंगाबाद जिला दूसरे और कैमूर जिला तीसरे स्थान पर है ।
Q.47. कृषि बिहार की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है । इस कथन की व्याख्या कीजिए ।
उत्तर - बिहार एक कृषिप्रधान राज्य । यहाँ की 80 % आबादी कृषि पर निर्भर है । झारखंड के अलग हो जाने के बाद बिहार के लोगो के लिए कृषि का महत्त्व बढ़ रहा है । 2005-06 से 59.37 % भूमि पर कृषि को जाती है । बिहार में धान , गेहूँ , मकई , जौ , गन्ना , ज्वार , तिलहन , दलहन , तम्बाकू फसलें होती है । यहाँ सकल घरेलू उत्पादन में कृषि का योगदान सर्वाधिक है । इसलिए कृषि बिहार की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है ।
Q.48. बिहार में नहरों के विकास से संबंधित समस्याओं को लिखिए।
उतर - बिहार में सिंचाई के लिए नहर प्रमुख साधन हैं । यहाँ के कुल सिंचित भूमि का लगभग 40 % भाग नहरों द्वारा सींचा जाता है । सिंचाई का प्रमुख साधन होने के बाद भी इसके विकास में अनेक बाधाएँ है - ( 1 ) नहरों के पेटी में गाद का जमाव ( 2 ) नहरों के बाँध का समूचित देख - भाल न होना ( 3 ) नहरों में सालोंभर पानी की अनुपलब्धता ।
मानचित्र अध्ययन
Q.49. सम्मोच्च रेखाओं द्वारा शंक्वाकार पहाड़ी का प्रदर्शन किस प्रकार किया जाता है ?
उत्तर - शंक्वाकार का अर्थ है शंकु के आकार का । जिस जमीन का आकार चौड़ा हो और ऊपर क्रमशः पतला होता गया हो उसे पहाड़ी कहते हैं । अर्थात् जमीन पर बड़ा गोलाकार घेरा बनाया जाता है और ऊपर क्रमशः घेरा छोटा होता जाता है जो चोटी पर पहुँच कर शून्य के आकार का हो जाता है । उदाहरण में ज्वालामुखी पहाड़ को रखा जा सकता है , जिसका क्रेटर निलय के निचले भाग जैसा होता है । शंक्वाकार पहाड़ी को बनाने में समोच्च रेखाओं का मान बाहर से अंदर की ओर बढ़ता जाता है । यानी अधिक ऊँचाई वाली समोच्च रेखाएँ अंदर की ओर होती है । जो पर्वत की चोटी को प्रदर्शित करती है ।
Q.50. तलचिह्न और स्थानिक ऊँचाई क्या है ?
उत्तर-जिस चिह्न को समुद्र तल से नापे गए भवनों , पुलों , खंभों या पत्थरों जैसे स्थाई वस्तुओं पर लगाते हैं , उसे तलचिह्न कहते हैं । इससे समुद्र की सतह से उसे स्थान की ऊँचाई का ज्ञान होता है । तलचिह्न की सहायता से किसी स्थान की मापी गई ऊँचाई को स्थानिक ऊँचाई कहते हैं । इसे बिन्दुओं की सहायता से बनाते हैं और ऊँचाई को अंकों की सहायता लेकर संख्यात्मक रूप से व्यक्त करते हैं । ध्यान रहे कि ऊँचाई से तात्पर्य समुद्र की सतह से ऊँचाई से होता है ।
Q.51. समोच्च रेखा से आप क्या समझते हैं ? इसकी दो विशेषताएं कौन-कौन सी है ?
उत्तर - समुद्र की सतह से विभिन्न ऊंचाइयों को दर्शाने के लिए छोटे - बड़े घेरा बनाते हुए जो रेखाएं खींची जाती है, उन्हें समोच्च रेखा कहते हैं। रेखाएं खींचने के पहले सर्वेक्षण कर लेना आवश्यक होता है ताकि ऊंचाई सही - सही स्पष्ट हो सकें । रेखाओं से सटे ऊँचाई का मान अंकित कर दिया जाए । मानचित्र में इसे अंकों से न दर्शा कर बादामी रंग से दर्शाते हैं । रंग को गाढ़ा और हल्का कर ढाल और समतल भूमि को दर्शाया जाता है । समोच्च रेखा की विशेषताएँ निम्नलिखित हैं : ( i ) समोच्च रेखा 0 से प्रारंभ होती है और इसके मध्य का अन्तर सदैव समान होता है । (ii) अगर समोच्च रेखा पास - पास हैं तो धरातल पर ढाल तीव्र होगा और समोच्च रेखा दूर - दूर है तो धरातल पर ढाल मंद होगा ।
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