उपसर्ग :- वह शब्दांश जो किसी शब्द के आगे जुड़कर उसके अर्थ को बदल देता है, उपसर्ग कहलाता है।
जैसे :-
प्रतिदिन ~ प्रति , अधिकार ~ अधि
पराजय ~ परा , विहार ~ वि
उपसर्ग ~ उप , आजीवन ~ आ
विशेष :- उपर्युक्त शब्दों में प्रति, अधि, परा, वि, उप तथा आ उपसर्ग है।
अलंकार :- वैसा शब्द जिसके प्रयोग से काव्य में चमत्कार, सौंदर्य और आकर्षण उत्पन्न होता है, उसे अलंकार कहते हैं।
जैसे :-
हरि पद कोमल कमल से
इस काव्य में उपमा अलंकार है क्योंकि यहां दो वस्तुओं (कोमल और कमल )के बीच समानता का भाव व्यक्त किया गया है।
अलंकार दो शब्दों से मिलकर बना होता है।
अलम् + कार
अलम् का अर्थ होता है सजावट
अलंकार के मुख्य तीन भेद होते हैं।
1. शब्दालंकार :- जिस काव्य में शब्द के माध्यम से चमत्कार (सुंदरता) उत्पन्न होता है, उसे शब्दालंकार कहते हैं।
जैसे :-
रहिमन पानी राखिए, बिन पानी सब सून।
पानी गए न उबरै, मोती मानुष चून।।
इस काव्य में पानी का तीन अर्थ हैं।
चमक ~ मोती के लिए
प्रतिष्ठा ~ मनुष्य के लिए
जल ~ आटा के लिए
2. अर्थालंकार :- जिस काव्य में अर्थ के माध्यम से चमत्कार (सुंदरता) उत्पन्न होता है, उसे अर्थालंकार कहते हैं।
जैसे :-
एक म्यान में दो तलवारें, कभी नहीं रह सकती हैं।
किसी और पर प्रेम नारियां, पति का क्या सह सकती है।।
यहां दोनों काव्यों का अर्थ समान है इसलिए यह अर्थालंकार का उदाहरण है।
3. उभय अलंकार :- जिस काव्य में शब्द तथा अर्थ दोनों के माध्यम से चमत्कार उत्पन्न होता है, उसे अलंकार कहते हैं।
जैसे :- ' कजरारी अंखियन में कजरारी न लखाय। '
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